Video regarding Demand of Bundelkhand state
सितम्बर 3, 2010Peepli Live must be baned : SANJAY PANDEY
अगस्त 19, 2010New Delhi. Peepli Live the movie which revolves around a debt ridden farmer committing suicide for the sake of compensation, trivializes this emotional issue and is “far from reality”, said Sanjay Pandey, the convener of Bundelkhand Akikrit Party.
Pandey said that this film is based on the suicide cases of farmers in Bundelkhand as well as in Vidarbha during last five dry years.
Peepli Live film has shown Natha, a poor farmer from Peepli village in Bundelkhand is about to lose land due to an unpaid government loan has got a quick fix to the problem is the very same government’s program that aids the families of indebted farmers who have committed suicide and as a means of survival Farmer Natha can choose to die and futher shown that His brother is happy to push him towards this unique ‘honour’ of suicide but Natha is hesitant ,this is totally untrue too much twisted from the ground reality and insult of poor dying farmers of Bundelkhand who are the victims of wrong policies of the government. So this movie has diverted from the basic issue of farmers’ suicide and hurt the sentiments of the rural folk.
“Although the film released last week has been hailed by critics as one of the smartest social satires to hit the Indian screens in years, it has not gone down well with the farming community”, Pandey added. Sanjay Pandey said that these critics perhaps forgot the emotional edge of innocent farmers because maximum of critics and the members of The Censor Board of Film Certification belonging to urban areas do not know the the poverty of Bundelkhand in reality. Also the central theme of the movie is the rural urban divide. Perhaps that’s why the movie has received a harshly response in the metros.
According to Sanjay Pandey, Peepli Live has made big question mark to farmers’ widows who are demanding compensation after their bread earner farmer’s suicide due to debt and crop failure . As this movie shows that farmers had been committing suicides for getting aid where as government had already denied these cases of suicides without even visiting house of dying family members. So Peepli Live will give strong support to such politicians and bureaucrats who never accepted these suicide cases due to starvation and debt. The film has tried to prove that farmers are not forced to kill themselves due to crises where as they themselves killing for money.
Finally Pandey said, “In the country of ” JAI -JAWAN, JAI-KISAN” the two hour entertainment of cinema-lovers is not much important than the respect of 60 crore farmers. Hence the film should be baned and the censorship certificate to the film should be taken back”
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राहुल के बयान से आहत हुए बुंदेलखंड राज्य के समर्थक
जनवरी 23, 2010झांसी: पिछले कई वर्षों से बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाए जाने की खुलकर वकालत करने वाले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने 19 जनवरी को भोपाल में यह बयान देकर कि वे न कभी अलग बुंदेलखंड राज्य के समर्थक थे न हैं, सबको चौंका दिया। निश्चित रूप से राहुल के इस बयान से पृथक बुंदेलखंड की मांग कर रहे आन्दोलनकारी आहत हुए हैं।
पृथक बुंदेलखंड के लिए संघर्षरत बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने राहुल के इस बयान को अवसरवादिता से प्रेरित बताया है। संजय के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बुंदेलखंड के झांसी में चुनावी सभा के दौरान इन्हीं राहुल ने चिल्ला-चिल्ला कर पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए हुंकार भरी थी। इससे पूर्व जनवरी 2008 में भी बुंदेलखंड दौरे पर आए राहुल ने झांसी की आम सभा में बुंदेलखंड राज्य की मांग करते हुए मायावती से रोड़े न अटकाने की अपील की थी। इसके अलावा, वे समय-समय पर अलग बुंदेलखंड के मुद्दे के साथ खड़े नजर आए, जो सारा देश जानता है।
लेकिन, हाल ही में भोपाल में उन्होंने अचानक ‘यू’ टर्न लेते हुए पृथक बुंदेलखंड का समर्थन न करने की अनपेक्षित बात कही। पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी के इस विरोधाभासी बयान के पीछे कारण कुछ भी हो, किन्तु राहुल में आए अचानक इस परिवर्तन ने यह सिद्ध कर दिया कि वे भारतीय राजनीति के उन अवसरवादी नेताओं की जमात से अलग नहीं हैं, जो राजनीतिक नफा-नुकसान सोच कर अपने बयान बदल लेते हैं। लिहाजा, इस कदम से उनकी जो छवि अभी तक बुंदेलखंड के लोगो में बन चुकी थी, कहीं न कहीं वह धूमिल जरूर हुई है।
People of Bundelkhand shocked at Rahul’s statement : SANJAY PANDEY
जनवरी 23, 2010The disappointment of the people found expression in Sanjay Pandey’s voice. The chief convener of the Bundelkhand Akikrit Party said, “The real face of Rahul Gandhi has been exposed now. He only flirted with us on the Bundelkhand issue. During the election campaign of the 15th Lok Sabha election in Jhansi he was shouting for a separate Bundelkhand state, but then the innocent Bundelkhandees did not know the reality of this congress man and hence they supported his party candidate Pradeep Jain. But Rahul has only played with our emotions.”
नए राज्यों का गठन सियासी लाभ-हानि से परे एवं न्याय-संगत हो : संजय पाण्डेय
दिसम्बर 26, 2009बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि लग रहा है कि केंद्र सरकार अपना राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर राज्यों के गठन पर विचार कर सकती है. किन्तु सरकार को अपना स्वार्थ न देख, राज्य निर्माण के औचित्य, जनभावना और अपरिहार्यता को देख निर्णय लेना चाहिये। वर्तमान में राज्यों का पुनर्गठन एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है विशेषकर तेलंगाना प्रकरण के बाद देश में कई इलाको से अलग सूबों की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र सरकार को इस धर्म संकट से निकलना भी एक बहुत बड़ी चुनौती होगी कि वो किस राज्य की मांग का समर्थन करे और किसको नामंजूर ? हालाँकि यह सच्चाई है कि आज देश में राज्यों के पुनर्गठन की जरूरत है क्योकि तीव्र जनसँख्या वृद्धि के चलते जैसे जैसे राज्यों का आकार बड़ा हो रहा है वैसे वैसे प्रशासनिक दक्षता और विकास दर में कमी आ रही है। यद्यपि देश में कई प्रान्तों के गठन की मांग चल रही है किन्तु बुंदेलखंड, तेलंगाना तथा विदर्भ जैसे इलाके वास्तव में प्रान्त बनाये जाने की पात्रता रखते हैं। आजादी के बाद से ही उपेक्षित पड़े इन अति पिछड़े क्षेत्रो को आज केन्द्रित विकास की दरकार है जो कि पृथक प्रान्त बनाये जाने पर निश्चित रूप से संभव होगा। पर कुछ राज्यों की मांग देखा देखी तथा होड़ में आकर उठने लगी है उनपर सरकार को तटस्थ रहना होगा। जैसे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अपने आप में संपन्न क्षेत्र है इसलिए इसका अलग राज्य बनाया जाना अनिवार्य नहीं है इसे टाला जाना चाहिये। इतना जरूर है की जिन क्षेत्रों की मांग सरकार ठुकराएगी वहां का जनमत सरकार के खिलाफ हो सकता है लेकिन सरकार को यह न देखते हुए अपनी मजबूत इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए उचित मांगों पर ही विचार करना चाहिये। हाँ, अब औचित्य पूर्ण राज्यों के गठन में आनाकानी भी नहीं करना चाहिये।
सीधी और त्वरित सहायता की जरूरत है बुन्देलखण्ड के किसानो को : संजय पाण्डेय
अगस्त 30, 2009झाँसी । बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक कार्यक्रम में कहा कि आज बुन्देलखण्ड के किसानो को सीधी और त्वरित सहायता की जरूरत है। सूखा राहत के नाम पर विभिन्न योजनाओ में जमकर बन्दर बाँट होता है , इसलिए पात्र किसानों को समय से और उचित मात्रा में राहत राशिः नही पहुँच पाती है। केन्द्र सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को पैकेज न देकर जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों को सीधी सहायता मुहैया करायी जाए। ये पहले ही सिद्ध हो चुका है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी राहत राशियों का जमकर दुरूपयोग किया है।लिहाजा अब पुनरावृत्ति से बचा जाना चाहिए। दूसरी ओर पाण्डेय ने यह भी कहा कि सूखा राहत मिलने के नियम कानून इतने जटिल होते है कि आम आदमी उन्हें समझ नही पाता है , इसलिए ऐसे में वह जान ही नही पाता है कि उसे कितनी राशि मिलनी चाहिए , फलस्वरूप उसे जो भी मिलता है वह उतने से ही संतुष्टि कर लेता है। अतः राहत देने का फार्मूला आसान हो । कहा कि बुन्देलखंड में सूखा पीड़ित किसानो द्वारा आत्म हत्याओं का सिलसिला शुरू हो चुका है इसलिए और मौतों का इंतजार न करते हुए सरकार को जल्द ही सहायता की सोचनी चाहिए। श्री पाण्डेय ने कहा कि वैसे तो इस वर्ष पूरे भारत में ही सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है किंतु बुन्देलखंड कि स्तिथि इसलिए हटकर है क्योंकि यहाँ सूखा का पहला साल नही बल्कि पिछले पॉँच वर्षों से यही हालत है। इसलिए सरकार को बुन्देलखंड के किसानो के बारे में प्राथमिकता से सोचना होगा। राहत प्रदान करते समय भी बुन्देलखंड के किसानो को देश के अन्य हिस्सों के किसानो से तुलना न करते हुए विशेष अधिभार दिया जाए। बताया कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी यहाँ के किसानों की समस्याओं को लेकर विशाल आन्दोलन शुरू करने जा रही है.
मानसून मे देरी से चिंतित है बुंदेलखंड का किसान
जून 23, 2009
एक बार फ़िर से बुन्देलखंड में सूखे जैसी नौबत की संभावना बन रही है। भीषण गर्मी में आमजन, पशु सब अकुला रहे है। गर्मी के तल्ख तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। मानसून के आने के बाद भी वर्षा न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरें पड़ गई है। सभी यह सोच कर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
गर्मी इस वर्ष अपने पूरे शबाब पर है। जिससे धरती से जल स्तर खिसकने लगा है। लगातार चार साल से बुंदेलखंड के किसानों को सूखे की मार झेलने के बाद पिछले वर्ष हुई बारिश ने कुछ राहत तो जरूर पहुंचाई थी। मगर इस वर्ष मानसून आने के बाद भी बारिश न होने से किसानों को फिर वहीं पुराने दिन याद आने लगे है। रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिये ग्रामीण अंचलों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गये है। महोबा जिले के कुलपहाड़ के मां बाघ विराजन मंदिर में पिछले एक सप्ताह से संकीर्तन और पूजा पाठ का दौर चल रहा है। किसान को भी फसल बुवाई के लिये बरखा रानी का इंतजार है। पहले 15 जून से ही आसमान से बारिश होने लगती है। जिससे किसान अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई करने लगता था। लेकिन इस वर्ष अब तक बारिश न होने से किसानों में चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है। सभी मायूस हो बस इंद्रदेव की मेहरबानी का इंतजार कर रहे है। लेकिन वह यह सोचकर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले चार वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। सभी किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय कहते है कि बुंदेलखंड मे उद्योगों का अभाव होने के कारण यहाँ का निवासी पूरी तरह खेती पर निर्भर है इसलिए वह मौ़सम में थोडी सी अनियमितता से ही घबरा जाता है. वे कहते है कि हमारी पार्टी इसीलिए सदैव सरकारों से मांग करती आ रही है कि बुंदेलखंड मे औद्योगिक विकास की दरकार है ताकि यहाँ का किसान कृषि का विकल्प तो पा सके.
बसपा तथा कांग्रेस से बदला लेने के मूड में है बुन्देली जनता
जनवरी 21, 2009बुन्देलखंड राज्य निर्माण के प्रति दोहरा नजरिया रखने वाले दलों को महंगा साबित होगा।जहां बसपा प्रमुख पृथक बुंदेलखंड राज्य की वकालत करती है वही वे इस आशय का प्रस्ताव केंद्र को भेजने से कतराती है . इसका मतलब उनकी सोच में कोई खोट है. इसी तरह कांग्रेस भी बुन्देलखंड की बात करती हैं पर दूसरा राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती.
वर्षो से हो रही कवायद के फलस्वरूप राज्य निर्माण का कार्य सिफर बना हुआ है। कभी केन्द्र सरकार प्रात निर्माण की गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल देती है तो कभी राज्य सरकार इसे किक कर पुन: केन्द्र सरकार के पाले में पहुंचा देती है। ये राजनैतिक दल बुंदेलखण्ड में फैले भ्रष्टाचार, अकाल की स्थिति पर आसू तो बहाते है, लेकिन इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए प्रात का निर्माण करने में पीछे हट जाते है। यही बड़ी वजह है कि बुन्देलखण्ड बड़ी कीमत चुकाने के पश्चात भी प्रात के रूप में पहचान हासिल नहीं कर पा रहा है।बुन्देलखण्ड का मसौदा वर्ष 1955 में ही तय कर लिया गया था, लेकिन तत्समय इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका, जिसका खामियाजा आज तक बुन्देलखंडियों को भुगतना पड़ रहा है। कई संगठन प्रात निर्माण के मुद्दे को जीवित बनाये हुए है। प्रात निर्माण के लिए बुन्देलखण्ड एकीकृत पार्टी ने उग्र आदोलनों की शुरुआत की है ,इन आदोलनों के पश्चात तेजी से सरकारों का ध्यान बुन्देलखण्ड की बदहाली पर गया . वर्तमान समय में बुन्देलखण्ड में अनेक कार्यक्रम प्रात निर्माण की लड़ाई के लिए चलाये जा रहे है। रैलियों, आदोलनों के फलस्वरूप भी प्रात अब भी देश के नक्शे पर उभर नहीं पाया है। बुन्देलखण्ड में इतना राजस्व प्राप्त होता है जो एक प्रात के लिए जरूरी है। इसके बावजूद भी सरकारे इसे प्रात का नाम देने में सकुचा रही है। बुद्धिजीवी लोगों का मानना है कि सरकारों द्वारा बुन्देलखण्ड को प्रात नहीं बनाने के पीछे बड़े राजनैतिक दल ही है . सपा जैसे भी कई दल है जो अलग प्रात बनाने पर सीधे तौर पर न कर चुके है। उन्हे लग रहा है यदि बुन्देलखण्ड राज्य बन गया तो उनका बड़ा वोट बैंक खिसक जायेगा। बुद्धिजीवी मानते है कि भले ही बुन्देलखण्ड में अशिक्षितों की बड़ी तादाद हो लेकिन समय आने पर इस क्षेत्र के लोग ऐसे राजनैतिक दलों को सबक सिखा देंगे।आगामी लोकसभा चुनाव में यहाँ की जनता इनसे खुलकर बदला लेने के मूड में है
एकीकृत पार्टी बनाएगी एक लाख नए सदस्य
जनवरी 18, 2009बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य है कि लोक सभा चुनाव से पूर्व पूरे बुंदेलखंड मे सदस्य संख्या कम से कम एक लाख हो जाये। हालाँकि देखने मे यह अत्यंत कठिन काम प्रतीत होता है, परन्तु पार्टी संगठन के पदाधिकारी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन रात लगे हुए हैं। बांदा मे सुरेन्द्र तिवारी, झाँसी मे कुवर बहादुर आदिम, छतरपुर मे राजा प्रजापति, चित्रकूट मे लवलीन द्विवेदी ने इस अभियान की शुरुआत कर दी है। पार्टी के प्रांतीय महासचिव सुरेन्द्र तिवारी ने बताया कि हम गाँव गाँव मे चौपाल लगाकर लोगो को सदस्यता गृहण करवा रहे हैं। पार्टी की साधारण सदस्यता शुल्क पॉँच रुपया तथा सक्रिय सदस्यता शुल्क दस रुपया रखी गयी है।